चारधाम यात्रा: कोमोरबिडिटी श्रद्धालुओं ने बढ़ाई सरकार की चिंता, 56 दिनों में 190 की मौत, 89 एयर एंबुलेंस से रेफर
उत्तराखंड में कोमोरबिडिटी वाले चारधाम यात्री सरकार के लिए चुनौती बने. 56 दिनों में 190 श्रद्धालुओं की मौत. रिपोर्ट- रोहित कुमार सोनी
देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान सावधानियां न बरतना श्रद्धालुओं पर भारी पड़ रहा है. चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से अभी तक स्वास्थ्य खराब होने के कारण मौतों का आंकड़ा इन 56 दिनों में ही चौंकाने वाले सामने आए है. उत्तराखंड चारधाम यात्रा के दो महीने पूरे होने वाले है, लेकिन अभी तक 190 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि शुगर, ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के मरीज भी बड़ी संख्या में यात्रा पर पहुंच रहे हैं. यही वजह है कि यात्रा के दौरान बीमार पड़ने पर अभी तक करीब 89 यात्रियों को हेली के जरिए रेफर किया जा चुका है, जबकि एंबुलेंस के जरिए 753 श्रद्धालुओं को रेफर किया गया है. आखिर क्या है मौजूदा स्थिति? आइए जानते हैं.
उत्तराखंड चारधाम की यात्रा जोरो- शोरों पर चल रही है. वर्तमान स्थिति यह है कि 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से 13 जून तक 34 लाख 77 हजार 834 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. हालांकि, आगामी मॉनसून सीजन के जल्द दस्तक देने की संभावना के बीच धीरे-धीरे यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम होती जा रही है. चारधाम की यात्रा शुरू होने के बाद 11 जून तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से 6 लाख 42 हजार 321 श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की गई है. जिसमें में 23 हजार 657 श्रद्धालु कोमोरबिडिटी (comorbidities) पाए गए हैं. जिन्होंने अपनी यात्रा को स्थगित करने के बजाए अपनी यात्रा को जारी रखा. इसके अलावा, हाई रिस्क स्थिति में 2697 यात्री पाए गए. लेकिन इसमें से मात्र 170 यात्रियों ने ही यात्रा पर न जाकर घर लौटने का निर्णय लिया.
उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, 19 अप्रैल से चार धाम की यात्रा शुरू होने के बाद अभी तक यानी इन 56 दिनों में 190 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. सबसे अधिक केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 91 श्रद्धालुओं, बदरीनाथ मार्ग पर 57 श्रद्धालुओं, यमुनोत्री मार्ग पर 25 श्रद्धालुओं और गंगोत्री मार्ग पर 17 श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत हो चुकी है. वहीं, 13 जून तक केदारनाथ धाम में 12 लाख 23 हजार 074 श्रद्धालु, बदरीनाथ धाम में 10 लाख 92 हजार 367 श्रद्धालु, गंगोत्री धाम में 5 लाख 95 हजार 166 श्रद्धालु और यमुनोत्री धाम में 5 लाख 56 हजार 227 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं.

ज्यादा जानकारी देते हुए डीजी हेल्थ डॉ सुनीता टम्टा ने कहा कि,
चारधाम यात्रा पर पिछले साल के मुकाबले बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं, जिसके चलते धामों में काफी अधिक भीड़ देखी जा रही है. यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य खराब होने की वजह से जिन श्रद्धालुओं की मौत हो रही है वो कोमोरबिडिटी के मरीज हैं, जिनकी उनकी उम्र 50 साल से अधिक है. ऐसे में उनके सभी श्रद्धालुओं को यही सुझाव है कि जो स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई है, उसका पालन करें. ताकि श्रद्धालुओं के मृत्यु दर को कम किया जा सके. ऐसे में आने वाले श्रद्धालुओं को 2 दिन में यात्रा करने की बजाय कम से कम एक हफ्ते में यात्रा संपन्न करना चाहिए. ऐसे में यात्रा के दौरान अगर कोई समस्या महसूस होती है तो यात्रा मार्गों पर बने स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर चेकअप जरूर करवाएं.
-डॉ सुनीता टम्टा, महानिदेशक, स्वास्थ्य विभाग-
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि,
उत्तराखंड चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई है. श्रद्धालुओं से यह भी अपील की गई है कि अगर कोई श्रद्धालु, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कार्डियक डिजीज, अस्थमा समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित है तो उसको स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद भी यात्रा पर आना चाहिए. खासकर 50 साल से अधिक उम्र के श्रद्धालुओं को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि उनको हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा ज्यादा होता है.
पैदल यात्रा कर रहे हैं और अगर थकान महसूस हो रही है तो पहलवानी न दिखते हुए आराम करें. कोई भी चीज सफल तभी होती है जब दोनों तरफ से सहयोग की भावना हो.
-सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड-
उत्तराखंड चारधाम यात्रा के धाम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित हैं. जहां पर यात्रा करने श्रद्धालुओं को अत्यधिक ठंड, तीव्र पराबैंगनी विकिरण, कम वायुदाब और ऑक्सीजन की कमी जैसी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. जिसको देखते हुए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल चारधाम यात्रा को लेकर हेल्थ एडवाइजरी जारी की जाती है. ताकि यात्रा पर आ रहे श्रद्धालुओं को बेवजह दिक्कतों का सामना न करना पड़े.

