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July 28, 2026

भंडारा करा दो बाबूजी’, भूखों का पेट भरने वाले रमाशंकर को आखिरी वक्त में भी नहीं मिला परिवार का साथ! ऐसे हुआ अंतिम संस्कार

भंडारे वाले बाबा रामशंकर गुप्ता का अंतिम संस्कार करा दिया गया। हरिद्वार पुलिस ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार

खड़खड़ी श्मशान घाट पर भंडारे वाले बाबा को आखिरी विदाई

परिजनों ने आर्थिक तंगी के कारण आने में जताई थी

हरिद्वार: ‘भंडारे वाले बाबा’ के नाम से मशहूर रामशंकर गुप्ता को अंतिम विदाई दे दी गई। पिछले दिनों उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया था। उनका शव मिलने के बाद पुलिस की ओर से जांच शुरू हुई। पोस्टमार्टम के साथ ही परिवार को उनके निधन की सूचना दी गई। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार हरदोई से हरिद्वार नहीं पहुंच सका। ऐसे में हरिद्वार पुलिस ने जिम्मेदारी निभाई। नगर कोतवाली पुलिस की ओर से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

कोतवाली पुलिस ने उठाई जिम्मेदारी

हरिद्वार की प्रसिद्ध हरकी पैड़ी इलाके में सालों तक श्रद्धालुओं से भंडारा कराने की अपील करने को लेकर रमाशंकर गुप्ता ‘भंडारे वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए थे। वे मूल रूप से हरदोई के रहने वाले थे। लेकिन, उन्होंने हरिद्वार में अपना बसेरा बना लिया था। ‘भंडारे वाले बाबा’ के निधन के बाद परिजनों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार हरिद्वार नहीं पहुंच सका।

इसके बाद नगर कोतवाली पुलिस ने पूरे सम्मान के साथ ‘भंडारे वाले बाबा’ का अंतिम संस्कार कराया। पुलिस ने हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की। पुलिस की ओर से इसका वीडियो भी जारी किया गया है।

9 को हुआ था निधन

‘भंडारे वाले बाबा’ के निधन की जानकारी पुलिस को 9 जुलाई को मिली थी। पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक व्यक्ति का शव मिला था। पुलिस की जांच में शव की शिनाख्त रमाशंकर गुप्ता(58) निवासी हरदोई के रूप में हुई। वह लंबे समय से हरकी पैड़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं से जरूरतमंदों के लिए भंडारा कराने की अपील करने के कारण ‘भंडारे वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे।

रामशंकर गुप्ता के निधन की जानकारी उनके परिजनों को हरदोई में दी गई। परिजनों ने आर्थिक तंगी के कारण हरिद्वार आने में असमर्थता जताई थी। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने उनके अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। खड़खड़ी श्मशान घाट पर उन्हें पूरे विधि-विधान के साथ आखिरी विदाई दी गई।

 

 

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