Categories

September 12, 2026

14 या 15 सितंबर? कब है गणेश चतुर्थी? जानें मूर्ति स्थापना का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी. सुबह 11:02 से दोपहर 01:31 बजे के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से बप्पा की स्थापना करें.

हैदराबाद: देश भर में सुख, समृद्धि और बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव यानी गणेश चतुर्थी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस साल गणेशोत्सव की सही तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है कि यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा या 15 सितंबर को. ज्योतिषविदों और राष्ट्रीय पंचांगों के अनुसार, उदयातिथि के नियम के आधार पर इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा.

लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के मुताबिक, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे प्रारंभ होगी. यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे समाप्त हो जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश का प्राकट्य दोपहर के समय हुआ था. चूंकि 14 सितंबर को दोपहर के समय चतुर्थी तिथि पूर्ण रूप से व्याप्त रहेगी, इसलिए इसी दिन घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना की जाएगी.

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को भगवान गणेश की पूजा और मूर्ति स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक रहेगा. श्रद्धालुओं को इसी ढाई घंटे की शुभ अवधि में बप्पा की पूजा-अर्चना और स्थापना करने की सलाह दी गई है.

बप्पा को घर लाने से पहले जरूर करें ये काम

  • प्रतिमा लाने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें और साफ वस्त्र धारण करके ही मूर्ति लेने जाएं.
  • बप्पा को घर लाते समय इस बात का विशेष ख्याल रखें कि रास्ते में उनकी आंखों पर लाल रंग का कपड़ा जरूर बंधा हुआ हो. यह कपड़ा स्थापना के समय ही हटाया जाता है.
  • जब बप्पा घर की चौखट पर आएं, तो पुष्पों की वर्षा और जयकारे लगाते हुए आनंद के साथ उनका गृह प्रवेश कराएं.

मूर्ति स्थापित करने के नियम और पूजन विधि

कैसा हो आसन: ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के अनुसार, बप्पा की मूर्ति स्थापित करने के लिए लकड़ी की चौकी का प्रयोग करें. इसे घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखें और उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर स्वास्तिक बनाकर अक्षत से अष्टदल कमल बनाएं.

पीठ न दिखे: स्थापना के समय ध्यान रखें कि प्रतिमा के पीछे का भाग (पीठ) आपके सामने न हो. बप्पा का मुख हमेशा आपके ठीक सामने दिखाई देना चाहिए.

दूर्वा और भोग: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र से बप्पा का ध्यान करें. भगवान गणेश को 21 दूर्वा के जोड़े उनके मस्तक पर चढ़ाएं, चरणों में नहीं. इसके बाद उनके प्रिय 21 मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं और अंत में धूप-दीप जलाकर महाआरती करें.

पर्यावरण की रक्षा के लिए धार्मिक समितियों ने भक्तों से केवल इको-फ्रेंडली मूर्तियों की ही स्थापना करने की अपील की है.

About The Author

Spread the love