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July 28, 2026

उत्तराखंड में दाखिल होने वाले हाइब्रिड वाहनों से भी वसूला जाएगा ग्रीन सेस, पॉलिसी में जल्द होगा संशोधन

उत्तराखंड में भी इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण कम हो सके.

देहरादून: उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जा रहा है. हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी वाहनों के साथ ही हाइब्रिड वाहनों को ग्रीन से छूट मिल रही थी. लेकिन अब परिवहन विभाग ने हाइब्रिड वाहनों को ग्रीन छूट के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है. इसके लिए परिवहन विभाग ने ग्रीन सेस वसूली पॉलिसी में संशोधन संबंधित प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है. साथ ही इस संशोधित प्रस्ताव को तैयार कर शासन को भेज दिया है. ऐसे में मंत्रिमंडल की मुहर के बाद इस नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा.

भारत सरकार के साथ ही उत्तराखंड सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है. इसके साथ ही इस बात पर जोर दे रही कि ईंधन वाले वाहनों का चलन कम हो ताकि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से पर्यावरण को बचाया जा सके. यही वजह है कि भारत सरकार ने पहले सीएनजी और अब इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट कर रही है. क्योंकि इससे पॉल्यूशन नहीं होता है. इसी को देखते हुए भारत सरकार के साथ ही उत्तराखंड सरकार ने भी हाइब्रिड वाहनों पर मिलने वाली टैक्स छूट को पहले भी समाप्त कर दिया है. लेकिन उत्तराखंड में इन वाहनों को ग्रीन सेस से छूट थी. जिसके चलते परिवहन विभाग ने इन वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने के लिए पॉलिसी में संशोधन प्रस्तावित किया है.

परिवहन विभाग का मानना है कि हाइब्रिड वाहन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में नहीं आते हैं. जिसके चलते ऐसे वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने का निर्णय लिया गया है. वहीं, ज्यादा जानकारी देते हुए अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने कहा कि ग्रीन सेस कलेक्शन पॉलिसी में एक छोटा सा संशोधन प्रस्तावित किया गया है. दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने पहले हाइब्रिड वाहनों को वन टाइम टैक्स में छूट देने का निर्णय लिया था, उस दौरान ग्रीन सेस नियमावली में भी हाइब्रिड वाहनों को छूट दे दी गई थी. लेकिन सरकार की ओर से हाइब्रिड वाहनों को वन टाइम टैक्स में छूट के निर्णय को वापिस ले लिया गया.

लेकिन ग्रीन सेस नियमावली में ये छूट बरकरार है. साथ ही बताया कि वर्तमान समय में लोगों की अवधारणा है कि सीएनजी के साथ पेट्रोल वाले वाहन हाइब्रिड वाहन हैं. जबकि हाइब्रिड वाहन वो है जो इलेक्ट्रिक के साथ ही अन्य फ्यूल वाले वाहन हैं. जिसके चलते ग्रीन सेस कलेक्शन पॉलिसी से हाइब्रिड वाहन शब्द को हटाया जा रहा है. ऐसे में जो वाहन सिर्फ सीएनजी से चलेंगे उनको ही छूट दिया जाएगा. जबकि जो वाहन सीएनजी एवं पेट्रोल आधारित है उनको ग्रीन सेस से छूट नहीं दी जाएगी. इसको लेकर ही संशोधन किया जा रहा है. हालांकि, इसपर वित्त विभाग की सहमति भी मिल चुकी है.

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