June 4, 2026

उत्तराखंड में चमत्कारी जड़ी की खोज में निकले हजारों लोग, ₹20 लाख प्रति किलो बिकती है ‘हिमालयन वियाग्रा’

15 हजार से ज्यादा लोग कीड़ा जड़ी की तलाश में छान रहे बुग्याल, पिथौरागढ़ के कई घरों में दिख रहे सिर्फ बच्चे और बुजुर्ग

पिथौरागढ़: उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र अद्भुत चीजों का भंडार है. यहां चमत्कारी जड़ी-बूटियां बहुतायत में मिलती हैं. ऐसी ही एक जड़ी है ‘कीड़ा जड़ी’ या ‘यारसा गुंबा’. कीड़ा जड़ी को हिमालयन वियाग्रा भी कहते हैं. ये हिमालय के बर्फ वाले चरागाहों जिन्हें स्थानीय भाषा में बुग्याल कहते हैं में पाई जाती है. जैसे जैसे बर्फ पिघलने लगती है, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोग कीड़ा जड़ी की खोज में निकल जाते हैं. यह हिमालय के 3000 मीटर से ऊपर के हिस्सों में पाई जाती है. कीड़ा जड़ी तब बनती है, जब कैटरपिलर एक घास खाता है.

बर्फ पिघलने के साथ ही कीड़ा जड़ी की तलाश शुरू: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों धारचूला और मुनस्यारी में कीड़ा जड़ी पाई जाती है. एक महीने पहले तक मुनस्यारी और धारचूला के ऊंचाई वाले बुग्याल बर्फ की मोटी चादर से ढके हुए थे. अप्रैल और मई में हुई बर्फबारी के कारण यारसा गुंबा (Yarsagumba) यानी कीड़ा जड़ी का सीजन तय समय पर शुरू नहीं हो पाया था. अब बर्फ पिघलने के बाद हालात बदल गए हैं.

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