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November 3, 2026

उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश, बीएसएम लॉ कॉलेज हरिद्वार के प्रतिनिधित्व पर 3 महीने में निर्णय ले बार बीसीआई

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने हरिद्वार के बीएसएम लॉ कॉलेज की याचिका का निस्तारण किया.

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट से हरिद्वार के बीएसएम लॉ कॉलेज को बड़ी राहत मिली है. न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने कॉलेज की याचिका का निस्तारण करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को आदेश दिया है कि वह कॉलेज द्वारा जमा की गई ₹6 लाख से अधिक की लेट फीस रिफंड करने संबंधी प्रतिनिधित्व पर तीन माह के भीतर निर्णय लें. मामले में कॉलेज का तर्क था कि सभी निर्धारित फीस समय पर जमा होने और विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलने के बावजूद बीसीआई ने अनुचित रूप से लेट फीस जमा कराई थी.

गौर हो कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बीएसएम लॉ कॉलेज हरिद्वार की याचिका का निस्तारण करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को आदेश दिया है कि वह कॉलेज के प्रतिनिधित्व पर तीन माह के भीतर निर्णय ले. न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने यह निर्णय दिया. कॉलेज ने याचिका में बीसीआई को ₹6,00,023.60 की लेट फीस ब्याज समेत वापस करने के निर्देश मांगे थे. यह राशि कॉलेज ने 21 मई 2026 को बीसीआई के ऑनलाइन पोर्टल पर जमा की थी. कॉलेज का कहना था कि वह एलएलबी पाठ्यक्रम में 180 सीटों की स्वीकृत सीटों के साथ संचालित है.

उसने ₹5 लाख की गारंटी फीस और सत्र 2025-26 से 2030-31 तक की निर्धारित मान्यता फीस पहले ही जमा कर दी थी. उसे विश्वविद्यालय से 2025-26 और 2026-27 की संबद्धता भी मिल चुकी थी. इसके बावजूद बीसीआई ने मान्यता प्रक्रिया के सिलसिले में लेट फीस जमा कराई, जिसे कॉलेज ने अनुचित बताया. इसके बाद कॉलेज ने 25 सितंबर 2026 को बीसीआई के सचिव को विस्तृत प्रतिनिधित्व देकर रिफंड करने प्रार्थना पत्र देके उसे वापस करने की मांगा की, लेकिन अब तक उन्हें यह राशि वापस नहीं हुई.

सुनवाई में कॉलेज की ओर से केवल यह प्रार्थना की गई कि प्रतिनिधित्व के निस्तारण का आदेश दे दिया जाए. बीसीआई के अधिवक्ता द्वारा इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई. इस पर कोर्ट ने बीसीआई को आदेश की प्रमाणित प्रति पेश किए जाने की तिथि से तीन माह के भीतर प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया. कोर्ट ने रिफंड के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की.

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